Smartphone Kaise Banta Hai? पूरी जानकारी हिंदी में

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मोबाइल फ़ोन कैसे बनता है- Smartphone Kaise Banta Hai?

Smartphone Kaise Banta Hai
Smartphone Kaise Banta Hai

स्मार्टफोन आज के समय की आवश्यक जरूरतों में से एक है और वर्तमान लिया है इतने आधुनिक हो चुके हैं कि बड़े से बड़े काम इनकी मदद से कुछ लिखने किए जा सकते हैं। स्मार्टफोन के आधुनिक होने की वजह से कई तरह की डिजिटल व्यवसायों व कम्पनियो को आगे बढ़ने का मौका मिला है जिससे क्षेत्र में कई रोजगार भी पैदा हुआ है। मोबाइल हमारे कितना काम आता है यह बात किसी से छुपी नहीं है तो ऐसे में हमारा यह जानना भी जरूरी है कि मोबाइल कैसे बनता है (मोबाइल फ़ोन कैसे बनता है Smartphone Kaise Banta Hai)? यह एक सामान्य रुचि का सवाल है जो अक्सर लोगों के दिमाग में आ सकता है और इसी का जवाब हम आपको देने वाले हैं।

दरअसल किसी भी गैजेट या आधुनिक उपकरणों को बनाने के लिए कई स्टेप्स से होकर गुजरना होता है। मोबाइल में कई तरह के पार्ट्स होते हैं और इसके अलावा इसकी डिजाइनिंग के लिए भी कई अलग-अलग कौन से होते हैं। मोबाइल में किस तरह की स्क्रीन डालनी है और किस तरह का कैमरा डालना है और किस बजट में मोबाइल को तैयार करना है यह सभी चीजें मैटर करती हैं! तो ऐसे में मोबाइल फ़ोन कैसे बनता है Smartphone Kaise Banta Hai सवाल का जवाब कुछ लाइनों में तो नहीं दिया जा सकता हैं। इसके कई स्टेप्स होते है और उन्ही के बारे में हम आपको बताने वाले हैं। तो चलिए शुरू करते हैं:

Step 1 :

Concept Designing – कॉन्सेप्ट डिजाइनिंग

आज के समय में हमें एक से बढ़कर एक डिजाइन वाले फोन देखने को मिलते हैं जिनमें काफी सारे शानदार फीचर्स और पावरफुल हार्डवेयर रहते हैं जिसका मुख्य कारण इन Smartphones की Concept Designing ही होती हैं। Concept Designing में यह तय किया जाता है कि इस स्मार्टफोन में किस तरह का कैमरा डाला जाएगा, किस तरह की बॉडी डाली जाएगी, किस प्रोसेसर का उपयोग किया जाएगा और स्मार्टफोन के सॉफ्टवेयर कैसे होंगे। जाने की कांसेप्ट डिजाइनिंग के अंदर ही स्मार्टफोन किस तरह का और कैसा होगा उसमें किस तरह के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर लगाए जाएंगे आदि के बारे में फैसला किया जाता है और उसके बाद कुछ स्मार्टफोन तैयार करके उनका टेस्ट किया जाता है। अगर टेस्ट सफल होते हैं तो ही विधि को आगे बढ़ाया जाता हैं।

Step 2 :

Component Making – कॉम्पोनेन्ट मेकिंग

Component Making स्मार्टफोन बनाने का वह भाग होता है जिसके अंदर कॉन्सेप्ट डिजाइनिंग के बाद स्मार्टफोन के कॉम्पोनेंट तैयार किए जाते हैं। सभी स्मार्टफोन पर कॉम्पोनेंट को प्रोडक्शन लैब में बनाया जाता है लेकिन किसी भी स्मार्टफोन के लिए सभी कॉन्पोनेंट कंपनी को तैयार नहीं करती। काहे कम कंपनियां ऐसी हैं जो अपने बनाए हुए ही सारे कॉम्पोनेंट इस्तेमाल करती है। अधिकतर कंपनियां केवल कुछ ही कॉम्पोनेंट बनाती है वह अन्य मुख्य कॉम्पोनेंट को दूसरी कंपनियों से प्राप्त करती है और बाद में उन सभी कॉम्पोनेंट को असेंबल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर एप्पल के स्मार्टफोन की स्क्रीन कोरिया में बनती है और प्रोसेसर के मेटेरियल मंगोलिया से मंगाए जाते हैं तो ऐसे में इन सभी पार्ट्स को एक जगह लाकर असेंबल किया जाता है और बाकी कई मुख्य कॉम्पोनेंट कंपनी खुद तैयार करती है।

Step 3 :

Assembling and Uploading – असेम्बलिंग और अपलोडिंग

स्मार्टफोन की कॉन्सेप्ट्स डिजाइनिंग के बाद उस डिजाइनिंग के अनुसार उसके कॉम्पोनेंट तैयार किए जाते हैं और उसके बाद उन कॉम्पोनेंट को जोड़कर स्मार्टफोन बनाने के लिए असेंबलिंग की प्रोसेस चलती है। दरअसल सभी कॉम्पोनेंट को जोड़ा जाता है और स्मार्टफोन तैयार किया जाता हैं। इसके बाद स्मार्टफोन में सभी आवश्यक इंटरनल और एक्सटर्नल चीजों को अपलोड किया जाता है। विभाग ने इस स्मार्टफोन में ऑपरेटिंग सिस्टम व अन्य कई फीचर जैसे कि ब्लूटूथ, वाईफाई आदि को भी जोड़ा जाता हैं। सभी कॉम्पोनेंट्स को जोड़कर उसका स्मार्टफोन बनाने की प्रोसेस की असेंबलिंग एंड अपलोडिंग कहलाती है। यह वह प्रोसेस होती हैं जहाँ स्मार्टफोन को मुख्य रूप से तैयार कर दिया जाता हैं।

Step 4 :

Touch Sensitivity – टच सेंसिटिविटी

मोबाइल कैसे बनता हैं (Mobile Kaise Banta Hai) की प्रोसेस में कॉम्पोनेंट को बनाने का डिजाइन करने के बाद जो तीसरा प्रमुख काम किया जाता है वह टच सेंसटिविटी का होता है। कॉम्पोनेंट तैयार करने के बाद उन्हें असेंबल किया जाता है और उसके बाद इस स्मार्टफोन की टच सेंसटिविटी को कई मशीनों के द्वारा चेक किया जाता हैं। स्मार्टफोन बनाने के सबसे महत्वपूर्ण भागों में से एक है क्योंकि टचस्क्रीन स्मार्टफोन का वह भाग होता है जो उसे User को Access करने को Allow करता हैं। कई विशेष मशीनों के द्वारा करीब 10,000 से भी ज्यादा बार स्मार्टफोन पर कई तरह के टच करके उसे चेक किया जाता है और इससे स्मार्टफोन की टच सेंसटिविटी का पता लगता हैं। इस प्रोसेस ना अगर फोन में टच या फिर किसी भी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को लेकर कोई समस्या होती है तो उसके बारे में भी पता लग जाता है।

Step 5 :

Internal Features – इंटरनल फीचर्स

जैसा कि हमने आपको बताया कि Concept Designing के बाद कॉम्पोनेंट बनाए जाते हैं और उन्हें जोड़कर इस Smartphone को तैयार किया जाता है और उसमें Operating System के साथ कई अन्य Internal Features ऐड किये जाते हैं। उसके बाद सभी हार्डवेयर्स को मुख्य रूप से टच सेंसटिविटी प्रोसेस के द्वारा चेक कर लिया जाता है लेकिन इंटरनेट फीचर्स को चेक करने के लिए भी एक राउंड जरूरी होता हैं। इंटरनेट फीचर जैसे कि ऑपरेटिंग सिस्टम और UI आदि को Internal Features के इसी राउंड में चेक कर लिया जाता हैं। इस राउंड में सभी इंटरनल फीचर्स को आता जाता है और जिन में कमियां होती है उन्हें वापस पिछले राउंड में भेजकर सही किया जाता है और इस तरह से उनकी कमियां पूरी होती हैं।

तो यह थे ‘मोबाइल कैसे बनता हैं’ (Smartphone Kaise Banta Hai) के जवाब के कुछ मुख्य स्टेप्स! उम्मीद हैं कि आपको यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित हुआ होगा। धन्यवाद।

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